पाठ्यपुस्तक क्या है, परिभाषा, विकास Pathyapustak kya hai

पाठ्यपुस्तक क्या है परिभाषा, विकास textbook kya hai 

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख पाठ्यपुस्तक क्या है पाठ्यपुस्तक की परिभाषा, तथा विकास (textbook kya hai) में।

दोस्तों इस लेख के माध्यम से आप पाठ्य पुस्तकें किसे कहते हैं? पाठय पुस्तकों की परिभाषा, पाठय पुस्तकों का विकास आदि पड़ेंगे। तो आइये करते है, शुरू यह लेख पाठ्यपुस्तक क्या है परिभाषा, विकास:-

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पाठ्यपुस्तक क्या है

पाठ्यपुस्तक क्या है Textbook kya hai 

पाठ्य पुस्तकें ज्ञान प्राप्त करने का वह माध्यम Medium होती है, जिन्हें अनुदेशात्मक सामग्री के रूप में उपयोग में लाया जाता है, अर्थात पाठ्यक्रम की वास्तविक रूपरेखा को पाठ्य पुस्तक के द्वारा ही स्पष्ट स्वरूप मिलता है,

जिससे शिक्षक एवं छात्र दोनों के लिए अधिगम (ज्ञान प्राप्त करना) सुगम हो जाता है। अधिगम अनुभवों के अर्जन में पाठक पुस्तकों का सबसे प्रमुख स्थान होता है। अच्छी पुस्तकें शिक्षण प्रक्रिया में निर्देशन का कार्य तो करती ही है, साथ ही पठन-पाठन शिक्षण की दृष्टि से छात्र और शिक्षक दोनों के लिए

सबसे उपयुक्त साधन Means माने जाते हैं। किसी विषय के ज्ञान को जब एक स्थान पर पुस्तक के रूप में संगठित कर उसे प्रस्तुत किया जाता है, तो उसको पाठक पुस्तक कहा जाता है। साधारण शब्दों में कह सकते है, कि पाठय पुस्तकें किसी भी विशिष्ठ ज्ञान को प्राप्त करने का सबसे सरल तथा सशक्त माध्यम है। 

पाठ्य पुस्तक की परिभाषा Definition of Textbook 

पाठ्यपुस्तक की परिभाषा अपने - अपने मत के अनुसार विभिन्न शिक्षाविदों ने निम्न प्रकार से दी है:- 

  1. डगलस के अनुसार - अध्यापकों के बहुमत ने अंतिम विश्लेषण के आधार पर पाठक पुस्तकों को मुख्य शिक्षण केंद्र समझा और किस प्रकार पढ़ाएंगे की आधारशिला माना है।
  2. लैंज के अनुसार - लैंज महोदय ने कहा, कि पाठय पुस्तकें अध्ययन क्षेत्र की किसी शाखा की एक प्रमाणिक पुस्तक होती है।
  3. बेकन के अनुसार - पाठ्य पुस्तक कक्षा प्रयोग हेतु विशेषज्ञों द्वारा सावधानी से तैयार या निर्मित की जाती, जो शिक्षण विधियों से भी सुसज्जित मानी जाती हैं।
  4. हैरोलिकर के अनुसार - पाठक पुस्तक ज्ञान, अनुभवों, भावनाओं, क्रियाओं तथा प्रवृत्तियों का संपूर्ण योग होता है।

पाठ्यपुस्तकों का विकास Development of Textbook 

हम सभी जानते है, कि वैदिक काल में किसी भी प्रकार की पाठ्य पुस्तकें नहीं थी उस समय में ऋषि-मुनियों, आचार्यों के द्वारा जो भी ज्ञान Knowledge दिया जाता था उसको सभी छात्रों को कंठस्थ (याद करना) ही करना ही पड़ता था।

उस समय पर आचार्यों के द्वारा गुरुओं के द्वारा वेदों के श्लोक छात्रों को सिर्फ कंठस्थ कराये जाते थे। इसके कुछ समय पश्चात ताम्रपत्र तथा बड़े-बड़े पत्तों पर लिखने का कार्य प्रारंभ हुआ, इतिहास में मुहरों पर चिन्ह तथा नंबर उत्कीर्ण करने की कला का विकास Development हुआ,

फिर राजा महाराजो के दरबारियों कवियों के द्वारा पत्थरों पर लिखने की कला विकसित हुई, जिन्हे शिलालेख Inscription अभिलेख कहा गया इसी क्रम में धीरे-धीरे लिखने की कला का विकास होता गया और लगभग 6000 ईसवी पूर्व लिखने की कला का विकास हो गया।

पाठ्यक्रम को दृष्टिगत रखते हुए पाठक पुस्तकों के विकास का इतिहास 16 वीं शताब्दी से माना जाता है। सबसे पहले कमेनियस (Comenius) ने 1592 से 1670 के मध्य भाषा शिक्षण की पाठ्य पुस्तक लिखी थी, फिर बिजेंद्र शिक्षा वेदालम

विषय विशेषज्ञों द्वारा पाठक पुस्तकों को महत्व दिया जाने लगा और पुस्तकें लिखी जाने लगी 19वीं शताब्दी में फ्रोबेल डीवी तथा महात्मा गांधी ने पुस्तक कें ज्ञान अर्जन का विरोध किया तथा अनुभव केंद्रीय तंत्रिका प्रधान शिक्षा पर बल देने लगे।

फलस्वरूप पाठक पुस्तकों के महत्व को कम समझा जाने लगा, किंतु तत्वों सिद्धांतों आदि की बोधगम्यता की दृष्टि से उनकी पूर्ण अपेक्षा नहीं की जा सकी। पाठक पुस्तकों के स्थान पर अनुभव या क्रिया प्रधान शिक्षा प्रदान करने के लिए कुछ शिक्षाविदों ने प्रयोग पद्धति को अपनाना प्रारंभ किया

और वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे, कि पाठक पुस्तकों का अंत नहीं हो सकता और इनके अभाव में शिक्षण प्रक्रिया करना असंभव ही है। शैक्षिक तकनीकी आने पर पाठक पुस्तकों के लेखन में परिवर्तन हुआ इंग्लैंड अमेरिका और रूस ने अभिक्रमित सामग्री के रूप में

निर्मित पाठक पुस्तकों के द्वारा अनुदान प्रदान करने की पद्धति अपनाई। हमारे देश में भी बड़ौदा एडवांस स्टडी सेंटर विश्वविद्यालय (University of Baroda Advanced Study Center) द्वारा अभिक्रमित स्वाध्याय एवं अन्य पद्धतियों पर आधारित पाठक पुस्तके निर्मित की गई।

इनके द्वारा छात्र कठिन पद्धतियों को भी स्वाध्याय द्वारा ही समझ सकते थे। हमारे देश में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) नई दिल्ली ने भी परंपरागत रूप को बदलकर शैक्षिक तकनीकी के प्रयोग के आधार पर अपनी स्वाध्याय सामग्री तैयार की है।

दोस्तों आपने यहाँ पर पाठ्यपुस्तक क्या है परिभाषा, विकास (Textbook kya hai) आदि तथ्यों के बारे में पढ़ा, आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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