महाकवि कालिदास पर निबंध Essay on kalidas in hindi

महाकवि कालिदास का निबंध Essay on kalidas 

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख मेरे प्रिय कवि कालिदास पर निबंध Essay on kalidas in hindi) में। दोस्तों इस लेख में आज आप कालिदास कौन थे? उनके जन्म शिक्षा आदि के साथ उनकी रोचक कहानी और कालिदास का जीवन परिचय जान पाएंगे। 

कालिदास का जीवन परिचय कई परीक्षाओं में पूँछा जाता है, इसलिए यहाँ से आप महाकवि कालिदास का जीवन परिचय लिखने का आईडिया भी ले सकते है। तो आइये शुरू करते है, यह लेख कालिदास का जीवन परिचय:-

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मेरे प्रिय कवि कालिदास पर निबंध

कालिदास कौन थे Who was kalidas 

प्राचीन काल में ऐसे कई कवि हुए हैं, जिन्होंने अपने शब्दों से कई रचनाएं की हैं और हिंदी साहित्य में चार चाँद लगा दिए। आज हम जिस कवि की बात करने जा रहे हैं। उन्होंने अपनी दूरदर्शी सोच और कल्याणकारी विचारों को अपनी रचनाओं में लिखकर साहित्य जगत में अपना अमूल्य योगदान दिया है।

मैं बात कर रही हूँ, महाकवि कालिदास जी की जो एक कवि और नाटककार तो थे ही उसके साथ साथ संस्कृत भाषा के प्रखंड विद्वान भी थे। महाकवि कालिदास जी ने भारत के प्राचीन दर्शन और पौराणिक कथाओं को आधार बनाकर रचनाएं लिखी हैं।

महाकवि कालिदास भारत के श्रेष्ठ कवि थे यह संस्कृत भाषा के महान कवि थे। महाकवि कालिदास जी की छवि बहुत ही सुंदर थी। वह हर किसी को अपनी तरफ आकर्षित कर लेते थे इसके साथ ही राजा विक्रमादित्य के दरबार में नवरत्नों में भी शामिल थे।

महाकवि कालिदास कवि के बारे में यह भी कहा जाता है,  कि यह बचपन से अनपढ़ और बहुत ही मूर्ख थे इन्हें चीजों की समझ नहीं थी, लेकिन बाद में साहित्य विद्वान हो गए और इन्हें संस्कृत साहित्य के महान कवि का दर्जा मिला।

महाकवि कालिदास का जन्म कब और कहाँ हुआ था Birth and birth place of kalidas 

संस्कृत के विद्वान महाकवि कालिदास का जन्म कब और कहां हुआ इसके बारे में अभी तक कोई स्पष्ट नहीं कर पाया है, कियोकि कालिदास के जन्म को लेकर विद्वानों में बहुत मतभेद है। कुछ विद्वानों का मानना है, कि इनका जन्म उत्तराखंड में हुआ था और कुछ विद्वानों का मानना है, कि इनका जन्म स्थान उज्जैन है,

किन्तु किसी भी बात का भी कोई भी ठोस सबूत नहीं है। महाकवि कालिदास का जन्म उज्जैन शहर में इसलिए माना जाता है, क्योंकि इन्होंने अपने खंडकाव्य मेघदूत में उज्जैन शहर का जिक्र किया है, इसलिए इनका जन्म स्थान उज्जैन को माना जाता है।

कुछ विद्वानों ने यह सिद्ध करने की कोशिश की है, कि महाकवि कालिदास का जन्म उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में कविलोठा गांव में हुआ था। कालिदास ने यही अपनी प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की थी और यहीं पर उन्होंने अपना मेघदूत, कुमारसंभव और रघुवंशम जैसे महाकाव्य की रचना की थी।

कविता चार धाम यात्रा मान गुप्तकाशी में है और कुछ लोगों ने तो इन्हें बंगाल और उड़ीसा का भी साबित करने की कोशिश की है। कहते थे कि कालिदास की श्रीलंका में हत्या कर दी गई, लेकिन विद्वानों को इस पर भी शक है। कालिदास का जिक्र है, ज्ञानी पंडित के द्वारा इनका जन्म छठी सदी में माना जाता है।

महाकवि कालिदास जी प्रथम शताब्दी पूर्व से तीसरी शताब्दी ईस्वी के बीच के जन्मे माने जाते हैं, जिस तरह कालिदास जी के जन्म में मतभेद है उसी तरह कालिदास की मृत्यु में भी मतभेद है। अभी तक किसी ने यह पता नहीं लगा पाया, कि इनकी मृत्यु कहां हुई है।

महाकवि कालिदास का बचपन का नाम क्या था What was the childhood name of kalidas 

महाकवि कालिदास का बचपन का नाम रामबोला था। जन्म से कालिदास एक भेड़ बकरी चराने वाले थे। बुद्धिहीन होने के कारण उनको मूर्ख भी कहा जाता था, उनकी मूर्खता का प्रमाण उस घटना से होता है, की ये वृक्ष की जिस डाल पर बैठे थे उसी डाल को काट रहे थे। कालिदास जी ने यह काम मूर्खता के बस में किया बाद में यही कालिदास अपनी विद्वता के लिए प्रसिद्ध हुए।

कालिदास नाम बहुत ही सुंदर और आकर्षक नाम है इतना ही नहीं इसका मतलब भी बहुत अच्छा होता है. कालिदास नाम का व्यक्ति माँ काली का भक्त होता है और देवी काली के भक्त होना बहुत अच्छा माना जाता है

इसलिए इसकी झलक कालिदास के नाम के लोगों में भी दिखती है। महाकवि कालिदास अपनी कृतियों के माध्यम से हर किसी को अपनी तरफ आकर्षित कर लेते थे, जिसको उनकी रचनाओं की आदत लग जाती वह उनकी लिखी हुई कृतियों में एकदम लीन हो जाता था,

ठीक उसी तरह जिस तरह किसी सुन्दर वस्तु व्यक्ति को देखने के बाद देखते ही रह जाते हैं, जैसे कोई मनमोहक चीज हो उससे नजर ही हटती उसी तरह उनसे भी किसी की नजर नहीं आती जो एक बार देखा था वह देखता ही रह जाता था अत्यंत मनमोहक थे। 

महाकवि कालिदास की कहानी Story of Mahakavi kalidas 

महाकवि कालिदास बचपन से ही मूर्ख माने जाते थे कियोकि बचपन में उन्हें किसी भी चीज की जानकारी नहीं थी। महान कवि कालिदास की शादी सयोंग से राजकुमारी विधोतमा से हुई ऐसा कहा जाता है, कि राजकुमारी विधोतमा ने प्रतिज्ञा की थी कि जो भी उन्हें शास्त्रार्थ में हरा देगा उसी के साथ शादी करेंगी।

जब विधोतमा ने शास्त्रार्थ में सभी विद्वानों को हरा दिया तो अपमान से दुखी और इसका बदला लेने के लिए छल से कुछ विद्वानों ने कालिदास जी का राजकुमारी विधोत्तमा से शास्त्रार्थ करवाया और संयोगवश उनका विवाह राजकुमारी विधोतमा से करवा दिया।

आपको बता दें, कि कालिदास का परीक्षण के लिए राजकुमारी विधोतमा ने कालिदास जी से मौन शब्दावली में गूड प्रश्न पूछे जिसे कालिदास जी ने अपनी बुद्धि से मौन संकेतों से ही जवाब दे दिया।

पर कुछ दिनों बाद राजकुमारी को जब कालिदास की मंदबुद्धि का पता चला तो वह अत्यंत दुखी हुई और कालिदास जी को और यह कहकर घर से निकाल दिया कि सच्चे पंडित बने बिना घर वापस नहीं आना फिर क्या अपनी पत्नी ने अपमानित हुए कालिदास ने विद्या प्राप्त करने का संकल्प लिया

और सच्चे पंडित बनने की ठान ली और वह घर से निकल पड़े और मां काली की सच्चे मन से उपासना करने लगे जिसके बाद वह मां काली के आशीर्वाद से परम ज्ञानी और साहित्य में विद्वान बन गए इसके बाद वे अपने घर लौट गए और आज वह पूरी दुनिया में हिंदी साहित्य के सर्वश्रेष्ठ कवियों में से एक माने जाते हैं।

कालिदास की रचनाएँ Composition of kalidas 

कालिदास जी ने बहुत रचनाएँ की हैं, कई नाटक उपन्यास कहानी निबंध ऐसी कई रचना की है। कालिदास जी की सबसे पहली रचना की बात करें तो मालविकाग्निमित्रम् नाटक को माना जाता है।

इस नाटक में मालविका एवं अग्निमित्र शासक की प्रेम लीला का वर्णन किया गया है। कालिदास ने दूसरी रचना के रूप में अभिज्ञान शाकुंतलम् नाटक को लिखा जिसके बाद कालिदास को संस्कृत साहित्य मैं बहुत ही बड़ा स्थान मिला। कालिदास जी ने दो महाकाव्य की रचनाएं भी की जिनका नाम है

महाकाव्य रघुवंशम एवं कुमारसंभव। इन्होंने तो खंडकाव्य भी लिखे हैं मेघदूतम और ऋतुसंहारम इनकी रचनाओं में मुख्य रूप से उपमा अलंकार का बहुत ही सुंदर प्रयोग किया जाए किया गया है। कालिदास जी ने कुल सात काव्य ग्रंथों की रचना की है, जिनमें से दो खंडकाव्य हैं दो महाकाव्य है इनके सभी काव्य में श्रृंगार रस की भी प्रधानता होती है।

विद्वानों के अनुसार कालिदास जी की सबसे अंतिम रचना तुषार को माना जाता है, क्योंकि कुमारसंभव को भी कालिदास की अंतिम रचना बताया जाता है और कहा जाता है, कि इसके बाद कालिदास की लेखनी बंद हो गई थी इस विषय में विद्वानों के बीच बहुत मतभेद है।

दोस्तों आपने यहाँ पर मेरे प्रिय कवि कालिदास पर निबंध, महाकवि कालिदास पर निबंध (Essay on Mahakavi kalidas) पढ़ा। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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