संघ प्रोटोजोआ के लक्षण, संघ प्रोटोजोआ का वर्गीकरण Phylum Protozoa Symptoms

संघ प्रोटोजोआ के लक्षण, संघ प्रोटोजोआ का वर्गीकरण Phylum Protozoa Symptoms 

दोस्तों यहाँ पर संघ प्रोटोजोआ का वर्गीकरण प्रोटोजोआ क्या है संघ प्रोटोजोआ के सामान्य लक्षण आदि के बारे में बताया गया है, जो एक नॉलेज और प्रतियोगिता की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है।

यहाँ आप जीवों के पहले संघ प्रारम्भिक जीवों के शरीर रचना वर्गीकरण स्वभाव आदि के बारे में भी जान पाएंगे। तो आइये शुरू करते है, यह लेख संघ प्रोटोजोआ का वर्गीकरण:-

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प्रोटोजोआ क्या है What is Protozoa 

जीवों के विकास का एक बड़ा ही अद्भुत क्रम है और इसमें लाखों वर्षों का समय लगा जिसमें सबसे पहले विकसित होने वाले जीव थे प्रोटोजोआ (Protozoa)  जिन्हे प्रारम्भिक आदिम जीवों (Primary Animals) के नाम से जाना जाता है।

यह वे सूक्ष्मजीव (Microorganism) थे, जिनकी शारीरिक संरचना सरल प्रकार की थी तथा जल और थल में रहने योग्य थे इसलिए साधरण भाषा में कहा जा सकता है, कि प्रोटोजोआ वे जीव है जो प्रारम्भिक एककोशिकीय होते है। 

प्रोटोजोआ की परिभाषा Definition of Protozoa 

वे सभी प्रकार के प्रारंभिक और प्राथमिक जंतु जिन्हे सूक्ष्मदर्शी की सहायता से ही देखा जा सकता है तथा यूकैरियोटिक प्रकृति के होते हैं, इनका शारीरिक संगठन अकोशिकीय प्रकार का होता है उन्हें संघ प्रोटोजोआ के अंतर्गत शामिल किया गया है। 

संघ प्रोटोजोआ का नामकरण Nomenclature of phylum protozoa

संघ प्रोटोजोआ के जंतुओं का सामान्य नाम प्रारंभिक जंतु या फिर प्राथमिक जंतु है, जबकि प्रोटोजोआ शब्द प्रोटोस (Protos) जिसका अर्थ होता है प्रारंभिक (Primitive) और जून (Zoon) जिसका अर्थ होता है जंतु (Animals) से मिलकर बना है,

इस प्रकार से संघ प्रोटोजोआ के जंतुओं का नामकरण प्रोटोजोआ किया गया, जो इनके गुणों के आधार पर ही है। प्रोटोजोआ का सबसे पहले अध्ययन ल्यूवेनहॉक (Leeuwenhoek) नामक वैज्ञानिक ने 1677 में किया था, जबकि इन जंतुओं का नामकरण संघ प्रोटोजोआ गोल्डफस (Goldfuss) नामक वैज्ञानिक ने 1822 में किया था। 

संघ प्रोटोजोआ के प्रमुख लक्षण Major characteristics of phylum protozoa

संघ प्रोटोजोआ के प्रमुख लक्षण निम्न प्रकार से हैं:-

  1. आवास और प्रकृति :- संघ प्रोटोजोआ के जंतु स्वतंत्रजीवी सहजीवी और सहभोजी प्रकार के जबकि कुछ परजीवी प्रकार के होते हैं और यह जल और स्थल दोनों ही वातावरण में पाए जाते हैं। अधिकतर इस संघ के जंतु एकल जबकि कुछ निवाही भी होते है।
  2. शारीरिक आकृति और आकर :- इस संघ के जंतु अधिकांश छोटे-छोटे और सूक्ष्मदर्शी होते हैं, इनका शरीर का परिमाण (Size) 0.0001 से 5.0 एमएम तक होता है, इनका शरीर की आकृति स्थाई होती है।
  3. शारीरिक संगठन और सममिति:- इस संघ के जीव जंतुओं का शारीरिक संगठन प्रोटोप्लास्मिक (Protoplasmic) प्रकार का होता है, जबकि यह जंतु असमितीय होते हैं।
  4. प्रचलन:- इस संघ के जंतुओं में प्रचलन तथा चालन करने के लिए विशेष प्रकार के अंगक कूटपाद (Pseudopod) फ्लेजिला (Flagella) और शीलिया (Cilia) पाए जाते हैं।
  5. पोषण :- यह जंतु प्राणीसम पादपसम और परजीवी प्रकार का पोषण प्रदर्शित करते हैं।
  6. शवशन और परिसंचरण :- इन जंतुओं में शवशन शारीरिक सतह के द्वारा होता है, जबकि आवश्यक पदार्थ का अंतर कोशिकीय परिसंचरण देखने को मिलता है।
  7. परासरण और उत्सर्जन:- इन जंतुओं में प्रसारण प्रोटेप्लाज्म से जल एवं लवणों की सांद्रता का नियंत्रण संकुचनशील रिक्तिका के द्वारा किया जाता है, जबकि इनमें उत्सर्जन का कार्य प्रोटेप्लाज्म से उत्सर्जी पदार्थ को पृथक करने में संकुचनशील रिक्तिका का एवं विसरण की प्रक्रिया के द्वारा शारीरिक सदस्य किया जाता है।
  8. प्रजनन:- इन जंतुओं में अलैंगिक प्रकार का प्रजनन द्विखंडन और बहुखंडन प्रकार का, जबकि लैंगिक प्रजनन युग्मन को द्वारा देखने को मिलता है।
  9. जीवन चक्र:- इन प्राणियों में पीढ़ियों का एकांतरण पाया जाता है।

संघ प्रोटोजोआ का वर्गीकरण Classification of Phylum Protozoa

संघ प्रोटोजोआ को दो उपसंघों (Sub-Phylum) में विभाजित किया गया है

  1. प्लाज्मोंड्रोमा
  2. सीलीयोफोरा

उपसंघ (Sub-Phylum) 1. प्लाज्मोंड्रोमा (Plasmodroma)

सामान्य लक्षण:-

  1. इस सब फाइलम में कूदपाद या फ्लेजिला या दोनों ही प्रचलन अंग होते है।
  2. इस सब फाइलम में एक या अनेक, किंतु एक आकारीय केंद्रक पाए जाते हैं। इस उपसर्ग को चार वर्गों में विभाजित किया गया है:- 

वर्ग (Class) 1. फ्लेजिलेटा (Flagellata)

सामान्य लक्षण:-

  1. इस वर्ग के जीव जंतुओं के शरीर पर पेलीकल या क्यूटीकल का आवरण पाया जाता है और यह प्राणी एक निश्चित आकार के होते हैं।
  2. इन प्राणियों में केंद्रक एक होता है, जो बड़ा होता है, जबकि यह प्राणी एकाकी सरल और निवाही होते है।
  3. इनमें पोषण क्रिया स्वपोषी विषमपोषी दोनों प्रकार की देखने को मिलती है, जबकि इनमें अलैंगिक प्रजनन पाया जाता है, जो अनुदैर्ध्य द्विखंडन के द्वारा होता है।

इस वर्ग को दो उपवर्गों में बांटा गया है:-

उपवर्ग (Sub-Class) 1. फाइटोमैस्टिजिना (Phytomastigina)

उदाहरण :- क्रिसअमीबा, युग्लीना, पैरानीम

उपवर्ग (Sub-Class) 2. जुमेस्टिगोफोरा (Zoomastigophora)

उदाहरण :- ट्रिपेनोसोमा, लीशमानिया

वर्ग (Class) 2. राइजोपोडा (Rhizopoda)

सामान्य लक्षण:-

  1. इस वर्ग के सभी प्राणी स्वतंत्रजीवी और परजीवी होते हैं
  2. इनमें कुछ प्राणियों के शरीर पर बाह्य कवच पाया जाता है जबकि कुछ में कंकाल भी हो सकता है।
  3. इस वर्ग के प्राणियों में प्रचलन कूटपाद के द्वारा होता है जबकि पोषण प्राणीसम या मृतोपजीवी देखने को मिलता है।
  4. इन प्राणियों में प्रजनन अलैंगिक और द्विखंडन के द्वारा होता है।

इस वर्ग को दो उपवर्गों में बांटा गया है:-

उपवर्ग (Sub-Class) 1. सार्कोडिना (Sarcodina)

उदाहरण :- अमीबा, एंटअमीबा, पॉलीस्टोमोला

उपवर्ग (Sub-Class) 2. एक्टिनोपोडा (Actinopoda)

उदाहरण :- एक्टिनोमा, एक्टिनोफ्रीश

वर्ग (Class) 3. स्पोरोजोआ (Sporozoa)

सामान्य लक्षण:-

  1. इस वर्ग के अंतर्गत सभी प्रकार के प्राणी परजीवी होते हैं
  2. इनके शरीर पर क्यूटीकल कल का बना होगा एक आवरण पाया जाता है।
  3. इस वर्ग के प्राणियों में पोषण मृतोपजीवी तथा शरीर की सतह से विसरण क्रिया के द्वारा होता है।
  4. अलैंगिक प्रजनन और बहु विखंडन द्वारा लैंगिक जनन संयुग्मन के द्वारा होता है।

इस वर्ग को पांच उप वर्गों में विभाजित किया गया है:- 

उपवर्ग (Sub-Class) 1. टीलोस्पोरिडिया (Telosporidia)

उदाहरण :- प्लाज्मोडियम

उपवर्ग (Sub-Class) 2. पाइरोप्लाज्मामिया (Pyroplasmia)

उदाहरण :- बबेसिया

उपवर्ग (Sub-Class) 3. नीड़ोस्पोरिड़ा (Cnidosporida)

उदाहरण :- मिक्सोडियम

उपवर्ग (Sub-Class) 4. एनीडोस्पोरिड़िया (Aenidosporidia)

उदाहरण :- टॉक्सोप्लाज्मा

उपवर्ग (Sub-Class) 5. ओपेलिनेटा (Opalinata)

उदाहरण :- सारकोसिसिटस

वर्ग (Class) 4. ओपेलिनेटा (Opalinata)

सामान्य लक्षण :-

  1. इस वर्ग के सभी प्राणियों में कोसामुख अनुपस्थित होता है।
  2. यह सभी प्राणी सीलिया के द्वारा प्रचलन करते हैं, जो एक ही आकर के होते हैं।
  3. इन प्राणियों में केंद्रक दो या दो से अधिक भी समान पाए जाते हैं।
  4. इस बल के प्राणियों में लैंगिक जनन होता है, जो संयुग्मन के द्वारा होता है।

उदाहरण :- ओपेलाइना

उपसंघ (Sub-Phylum) 2. सीलियोफोरा (Ciliophora)

सामान्य लक्षण :-

  1. इस उपसंघ में प्राणियों में प्रचलन अंग के रूप में सीलिया पाए जाते हैं।
  2. इन प्राणियों में केंद्रक दो प्रकार का माइक्रो तथा मैक्रो न्यूक्लियस होता है
  3. इनमें अलैंगिक जनन बिखंडन और मुकुलन के द्वारा देखने को मिलता है, जबकि लैंगिक जनन संयुग्मन के द्वारा होता है।

इस उपसंघ के अंतर्गत एक वर्ग आता है:- 

वर्ग (Class) 1. सिलियेटा (Ciliata)

सामान्य लक्षण:-

  1. इस वर्ग के प्राणी एकाकी बाह्य और अंत:परजीवी के रूप में होते हैं।
  2. इनके शरीर पर पेलीकल का आवरण पाया जाता है।
  3. शरीर पर अनेक सीलिया होते हैं, जो प्रचलन का कार्य मैं मदद करते हैं
  4. इस वर्ग के अधिकांश प्राणियों में बड़ा और छोटा केंद्र पाया जाता है।
  5. इनमें जनन अलैंगिक द्विविभाजन द्वारा और मुकुलन के द्वारा देखने को मिलता है।

इस वर्ग को चार उप वर्गों में बांटा गया है:- 

उपवर्ग (Sub-Class) 1. होलोट्राईका (Holotricha)

उदाहरण :-:कोलपोडा, कोल्पीडियम

उपवर्ग (Sub-Class) 2. पेरीट्राइका (Peritricha)

उदाहरण :- वर्टीसेला

उपवर्ग (Sub-Class) 3. सक्टोरिया (Suctoria)

उदाहरण :- ऐसीनेटा

उपवर्ग (Sub-Class) 4. स्पाइरोट्राईका (Spirotricha)

उदाहरण :-निकटोथीरस

दोस्तों यहाँ पर आपने संघ प्रोटोजोआ के 4 लक्षण, संघ प्रोटोजोआ का वर्गीकरण (Phylum Protozoa Symptoms) आदि के बारे में पढ़ा आशा करता हुँ आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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